सरकार ने मास्क और सैनिटाइजर को आवश्यकता वस्तु अधिनियम से किया बाहर, जानिए वजह

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बिजनेस

Edited By: Pooja Jangid

Updated on: 1 मिनट पूर्व

नई दिल्ली. भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने मास्क और सैनिटाइजर को आवश्यकता वस्तु अधिनियम में शामिल करने का फैसला लिया था लेकिन इसमें अब बदलाव कर दिया गया है. उपभोक्ता मामलों की सचिव लीना नंदन ने यह जानकारी देते हुए कहा कि फेस मास्क और सैनिटाइजर को अब आवश्यकता वस्तु अधिनियम 1955 के दायरे से बाहर निकाल दिया गया है. उन्होंने बताया कि भारत देश में मास्क और सैनिटाइजर की आपूर्ति पर्याप्त है अब यह आवश्यकता उत्पाद नहीं है.
आपको बता दें केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 13 मार्च को मास्क और सैनिटाइजर को 100 दिन के लिए एक आवश्यक वस्तु घोषित किया था.

साथ ही कोरोना वायरस महामारी की वजह से इन दोनों उत्पादों की मांग में जोरदार इजाफा हुआ था इसीलिए इन उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ जमाखोरी रोकने के लिए यह अहम फैसला लिया गया था.
उपभोक्ता मामलों की सचिव का कहना है कि हमने सभी राज्यों से बात की है और यह जानकारी सामने आई है कि सभी राज्यों में इन उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है. इन दोनों उत्पादों को 30 जून तक आवश्यकता वस्तु घोषित किया गया था लेकिन अब इसे और आगे नहीं बढ़ा रहे हैं क्योंकि देश में इसकी पर्याप्त आपूर्ति है.
आपको बता दें कि आवश्यकता वस्तु अधिनियम का उल्लंघन करने वाले को 7 साल कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है या फिर उन्हें जुर्माना भी भरना पड़ सकता है साथ ही जेल, जुर्माना दोनों से उन्हें दंडित किया जा सकता है. संभावना जताई जा रही है कि अब दुकानदार मास्क और सैनिटाइजर की मनमानी कीमत वसूल करेंगे.

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