5,000 करोड़ रुपये का बकाया लेकिन 500 करोड़ रुपये में ही मान गए बैंक, जानिए क्या है मामला

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बैंक शिवा इंडस्ट्रीज एंड होल्डिंग के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही को वापस लेने पर सहमति जताई है। बैंकों का कंपनी पर 5000 करोड़ रुपये का बकाया है लेकिन वे 500 करोड़ रुपये के ऑफर पर ही अदालत के बाहर मामले को सुलझाने के लिए सहमत हो गए।

नई दिल्ली
अमूमन बैंक किसी पर एक रुपया भी छोड़ने को तैयार नहीं रहते हैं लेकिन शिवा इंडस्ट्रीज एंड होल्डिंग (Siva Industries and Holding) के मामले में कमाल हो गया। बैंकों ने चेन्नई के बिजनसमैन सी शिवशंकरन की इस ग्रुप होल्डिंग कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही (bankruptcy proceedings) वापस लेने पर सहमति जताई है। बैंकों का कंपनी पर 5000 करोड़ रुपये का बकाया है लेकिन वे 500 करोड़ रुपये के ऑफर पर ही अदालत के बाहर मामले को सुलझाने के लिए सहमत हो गए। दिवालिया मामलों के जानकारों ने इसे एक अनोखा मामला करार दिया है क्योंकि बैंक पहले प्रमोटरों के इस तरह के ऑफर को ठुकराते आए हैं।

कंपनी के फाइनेंशियल क्रेडिटर्स में शामिल आईडीबीआई बैंक ने इसकी पुष्टि की है। बैंक ने एक बयान में कहा कि अधिकांश क्रेडिटर्स ने कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही को वापस लेने के पक्ष में वोट दिया। इस मामले में नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मंजूरी का इंतजार है। कंपनी के क्रेडिटर्स में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और मलेशिया की मैक्सिस कम्युनिकेशंस बीएचडी शामिल हैं। जानकारों के मुताबिक शिवशंकरन ने कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही वापस लेने और बकाये के सभी दावों को खत्म करने के लिए बैंकों को 500 करोड़ रुपये की पेशकश की थी। बैंकों ने पिछले हफ्ते इसके पक्ष में वोट दिया।

अनोखा मामला
अहमदाबाद के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल उमेश वेद ने कहा कि ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि किसी कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू होने बाद बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन मामले को निपटाने के लिए प्रमोटर्स के ऑफर को स्वीकार करें। किस कंपनी को दिवालिया कार्यवाही में घसीटने अंतिम विकल्प होता है। इसलिए इस तरह का सेटलमेंट कम ही देखने को मिलता है। कंपनी पर बैंकों और दूसरी वित्तीय संस्थाओं का 5000 करोड़ रुपये का बकाया है। टाटा संस ने भी 863 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था लेकिन इसे कंपनी के अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने खारिज कर दिया था।

कौन हैं शिवशंकरन
सी शिवशंकरन चेन्नई के बिजनसमैन हैं जिन्होंने टेलिकॉम कंपनी एयरसेल (Aircel) की स्थापना की थी। साथ ही उन्होंने देश में कॉफी चेन बरिस्ता (Barista) की भी स्थापना की थी। आईडीबीआई लोन केस में उन्हें सीबीआई की जांच का सामना करना पड़ा था। शिवा इंडस्ट्रीज एंड होल्डिंग पर बैंकों का 5,000 करोड़ रुपये का बकाया है। इस कंपनी के खिलाफ 2019 में दिवालिया कार्यवाही शुरू की गई थी।

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