DNA Analysis: Are we ready to boycott china forever? | DNA ANALYSIS: क्या हम चीन के सामान के बहिष्कार के लिए तैयार हैं?

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नई दिल्ली: अब हम उस मुहिम की बात करेंगे जो मेड इन इंडिया को मजबूत बनाने के लिए बहुत जरूरी है. चीन का बहिष्कार सस्ता नहीं बल्कि मंहगा होता है. लेकिन क्या आप इसके लिए तैयार हैं? क्या आपके अंदर देशभक्ति की इतनी मात्रा है कि आप अपना मुनाफा कम करके और थोड़ा ज्यादा पैसा खर्च करके चीन को जवाब दे सकें. आज हम ये समझाने की कोशिश करेंगे कि मेड इन चाइना को हराने के लिए और मेड इन इंडिया को मजबूत बनाने के लिए भारत के लोग कितने तैयार हैं. आज हम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और खिलौनों के बाजार को आधार बनाकर इसका विश्लेषण करेंगे.

भारतीय में खिलौना बाजार लगभग 13 हजार करोड़ रुपये का है जिसमें लगभग 85 से 90 प्रतिशत खिलौने मेड इन चाइना होते हैं. इसके अलावा भारत में जो खिलौने बनते हैं, उनका कच्चा माल भी चीन से ही आता है.

भारतीय बाजारों में LED बल्ब के व्यापार में चीन की कंपनियों का मार्केट शेयर 36 प्रतिशत है और भारतीय कंपनियां भी LED बल्ब्स को तैयार करने के लिए कच्चा माल चीन से ही मंगवाती हैं.

भारत के स्मार्टफोन बाजार में 65 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से पर चीन की कंपनियों का कब्जा है.

इसी तरह स्मार्ट टीवी बाजार में चीन की कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत है.

इलेक्ट्रॉलिक्स के बाजार में चीन की हिस्सेेदारी
इसके अलावा इलेक्ट्रॉलिक्स के बाजार की 45 प्रतिशत, गारमेंट्स में 27 प्रतिशत और ऑटो सेक्टर में 9 प्रतिशत जरूरतें चीन से पूरी होती हैं.

लेकिन अब देश के लोगों ने मेड इन चाइना सामान के खिलाफ स्वदेशी मुहिम छेड़ दी है. जिसका असर अब बाजारों में दिखने लगा है. ज़ी न्यूज़ ने चीन के सामान की डिमांड और सप्लाई में आई कमी से जुड़ी एक ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है. 

देखें ये रिपोर्ट



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