DNA ANALYSIS of why gandhi family loves government bungalows so much | DNA ANALYSIS: गांधी परिवार को सरकारी बंगलों से इतना प्यार क्यों है?

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नई दिल्ली: हमारे देश में अगर कोई एक बार सत्ता का हिस्सा बन जाए तो वर्षों बीत जाने के बाद भी वो व्यक्ति और उसका परिवार सत्ता का मोह नहीं छोड़ पाता. और इस दौरान मिलने वाली सुविधाओं को तो ये नेता अपना जन्मसिद्ध अधिकार मान लेते हैं और आजीवन इन सुविधाओं का लाभ उठाना चाहते हैं. लेकिन अब स्थितियां बदलने लगी हैं और सरकारी सुख सुविधाओं को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानने वालों के साथ सख्ती बरती जाने लगी है. उदाहरण के लिए बुधवार को भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को उनका सरकारी बंगला खाली करने आदेश दिया है. प्रियंका गांधी वाड्रा को ये नोटिस बुधवार को ही दिया गया है और उन्हें एक महीने के अंदर अपना सरकारी बंगला खाली करना होगा.

प्रियंका गांधी वाड्रा को दिल्ली के लोधी एस्टेट में स्थित अपना वो बंगला खाली करना होगा जिसमें वो वर्ष 1997 से रह रही हैं. ये इलाका उसी लुटियंस दिल्ली में आता है जहां बड़े-बड़े नेताओं के सरकारी आवास हैं. प्रियंका गांधी वाड्रा को ये बंगला इसलिए मिला था क्योंकि उन्हें Special Protection Group यानी SPG की सुरक्षा प्राप्त थी. जिन लोगों को ये सुरक्षा हासिल होती है उन्हें सरकार द्वारा रहने के लिए आवास दिया जाता है. लेकिन पिछले वर्ष प्रियंका गांधी वाड्रा की SPG सुरक्षा वापस ले ली गई थी और अब उन्हें Z Plus सुरक्षा हासिल है. इसलिए नियमों के तहत वो अब इस सरकारी बंगले में नहीं रह सकतीं. सरकारी रिकॉर्ड्स के मुताबिक प्रियंका गांधी वाड्रा पर 3 लाख 46 हजार 677 रुपये बकाया था, और हमारे सूत्रों के मुताबिक इस रकम का भुगतान उन्होंने बुधवार शाम को ही किया है.

वर्ष 2000 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में ये फैसला लिया गया था कि ये सरकारी बंगले सिर्फ उन्हीं लोगों को दिए जाएंगे जिन्हें SPG सुरक्षा हासिल होगी. उसके अलावा किसी प्राइवेट पर्सन को ऐसे सरकारी आवास नहीं मिलेंगे. अब प्रियंका गांधी वाड्रा को खुद ये सोचना चाहिए कि जब पिछले वर्ष नवंबर में उनकी SPG सुरक्षा वापस ले ली गई थी तब उन्होंने करीब 7 महीनों में खुद ये बंगला क्यों नहीं छोड़ दिया. अगर वो ऐसा करतीं तो देश की जनता की नजरों में उनका सम्मान बहुत बड़ जाता है. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. हालांकि सब नेता ऐसा नहीं करते. कुछ नेता नैतिकता का पालन करते हैं और सरकारी सुख सुविधाओं को पद से हटते ही छोड़ देते हैं.

उदाहरण के लिए भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपना सरकारी बंगला इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था. और खराब स्वास्थ्य की वजह से वो दोबारा मंत्री भी नहीं बनना चाहती थीं. इसलिए उन्होंने अपना सरकारी आवास खाली करने में जरा भी देर नहीं लगाई.

इससे कुछ दिनों पहले पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी अपना सरकारी आवास छोड़ दिया. सुषमा स्वराज की तरह अरुण जेटली का भी स्वास्थ्य ठीक नहीं था और वो केंद्र में कोई जिम्मेदारी उठाने की स्थिति में नहीं थे.

यानी अगर नेता चाहें तो सरकार द्वारा दी गई सुविधाओं को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानने की बजाय सिर्फ जनता की सेवा का जरिया मान सकते हैं और समय आने पर इन सुविधाओं को खुद ही छोड़ भी सकते हैं. लेकिन हमारे देश में अक्सर ऐसा होता नहीं और राजनीति की नैतिकता का पालन करने वालों की संख्या बहुत कम है.

प्रियंका गांधी वाड्रा का बंगला जिस जगह पर है वहां से सोनिया गांधी के बंगले की दूरी करीब 3 किलोमीटर है और राहुल गांधी का बंगला सिर्फ ढाई किलोमीटर दूर है. सोनिया गांधी का पता है 10 जनपथ जबकि राहुल गांधी का पता है 12 तुगलक लेन.

अब आप सोचिए दिल्ली के सबसे मंहगे और सुरक्षित इलाकों में एक ही परिवार के तीन-तीन सदस्य सिर्फ इसलिए वर्षों से रह रहे हैं क्योंकि उनका परिवार कभी सत्ता में था.

दिल्ली के सबसे महंगे और सुरक्षित इलाकों में गांधी परिवार के तीन सदस्य, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा जिन बंगलों में वर्षों से रह रहे हैं, उन बंगलों का आकार भी हम आपको बताते हैं.

सूचना के अधिकार के तहत मिली एक जानकारी के मुताबिक सोनिया गांधी के बंगले, दस जनपथ का क्षेत्रफल, 15 हजार 181 वर्ग मीटर है. जबकि राहुल गांधी, जिस 12, तुगलक लेन के बंगले में रहते हैं, उसका आकार करीब 5 हजार वर्ग मीटर है. प्रियंका वाड्रा के बंगले यानी 35 Lodhi Estate का आकार, 2 हजार 765 वर्ग मीटर है. अगर इन तीनों के बंगलों का एरिया जोड़ लिया जाए तो इसमें 300 से ज्यादा दो कमरे के फ्लैट्स बन सकते हैं. यानी 300 से ज्यादा लोगों की जगह पर सिर्फ 3 लोग रह रहे हैं.

एक तो इतने बड़े-बड़े बंगलों में रहना और फिर आजीवन इसे अपना बना लेना या फिर इसे संग्रहालय का रूप दे देना, ये काम नेहरू के जमाने से हो रहा है. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, जिस तीन मूर्ति भवन में रहते थे, उसे बाद में म्यूजियम बना दिया गया. पंडित नेहरू ने अपने जीवन के अंतिम 16 वर्ष यहीं पर बिताए थे.

इसी तरह से 1 सफदरजंग रोड, जहां पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी रहती थीं, उसे भी संग्रहालय बना दिया गया. यहीं पर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी.

इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को 10 जनपथ पर बंगला मिला, ऐसा कहा जाता है कि राजीव गांधी ने ये बंगला इसलिए लिया था, जिससे वो आसानी से कांग्रेस मुख्यालय पहुंच जाएं. आज भी सोनिया गांधी दस जनपथ के बंगले में ही रहती हैं. यानी एक तरह से इस बंगले पर गांधी परिवार का कब्जा हो गया.

राहुल गांधी भी जीवन भर सरकारी बंगलों में ही रहे हैं. राहुल गांधी पहले 10 जनपथ पर रहते थे, 2004 में सांसद बनने के बाद वो 12 ए तुगलक लेन के बंगले में चले गए, और तब से वो इसी बंगले में रहते हैं.



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