DNA ANALYSIS: Tension on India China border, T-90 bhishma tank deployed at ladakh | DNA ANALYSIS: चीन को धूल चटाएगा भारत का महाबली ‘भीष्म’, जानें इसकी खासियत

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नई दिल्ली: भारत-चीन के बीच बढ़ते सीमा विवाद को देखते हुए सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे दो दिन से लद्दाख में हैं. मंगलवार को वो लेह में गलवान घाटी के घायल सैनिकों से मिले थे. उन्होंने अपने कोर कमांडर्स से बातचीत की थी और ग्राउंड जीरो के बारे में जानकारी ली थी, बुधवार को वो पूर्वी लद्दाख में स्थित कई फॉरवर्ड पोस्ट पर गए और सैनिकों का मनोबल बढ़ाया. उन्होंने उन सैनिकों को सम्मानित किया, जिन्होंने गलवान घाटी में चीन की सेना का डटकर मुकाबला किया था. बुधवार को ZEE NEWS ने ही सबसे पहले ये एक्सक्लूसिव जानकारी आप तक पहुंचाई, कि चीन को जवाब देने के लिए भारत ने अपने सबसे घातक और सबसे भरोसेमंद हथियार टी-90 भीष्म टैंक को लद्दाख में उतार दिया है.

लद्दाख के खुले मैदानों में इन टी-90 टैंकों से बेहतर कोई हथियार नहीं है. पूर्वी लद्दाख में स्पांगुर गैप से होकर ये टैंक, सीधे चीन के नियंत्रण वाली सीमा में जा सकते हैं. इसके अलावा लद्दाख के डेमचौक इलाके में रणनीतिक तौर पर पांच महत्वपूर्ण पासों की सुरक्षा का जिम्मा भी ये टैंक आसानी से संभाल सकते हैं. इन दोनों ही इलाकों में खुले मैदान हैं, यहां पर जमीन रेतीली है, इसलिए यहां पर टैंकों के जरिए तेजी से बढ़ना आसान है. स्पांगुर गैप और डेमचौक दोनों ही जगहों से चीन का एक महत्वपूर्ण हाईवे G-219, करीब 50 किलोमीटर ही दूर है. इसलिए अगर युद्ध हुआ तो चीन के लिए इन टैंकों का सामना करना आसान नहीं होगा.

टी-90 भीष्म टैंक रशियन टेक्नोलॉजी से बना मेड इन इंडिया टैंक है. इसमें लेजर गाइडेड INVAR मिसाइल सिस्टम लगा है, जिससे चार किलोमीटर तक दुश्मन का कोई भी टैंक बच नहीं सकता. इसके Hunter Killer concept से गनर और कमांडर दोनों ही निशाना लगा सकते हैं. टैंक में 125mm की गन लगी है, और जिससे ये 60 सेकेंड में 8 गोले फायर कर सकता है. 48 टन वजन का ये टैंक, दुनिया के सबसे हल्के टैंक में से एक है.

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Self-Entrenching Plate यानी सामने लगे उपकरण के सहारे ये टैंक खुद को छिपाने के लिए खुद खाईं भी खोद सकता है. इस टैंक में दिन हो या रात, हर समय पर युद्ध लड़ने की क्षमता है. इसमें दुश्मन की किसी भी मिसाइल को रोकने का कवच है. इसमें 1000 हॉर्स पावर का इंजन है, और ये 72 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है. ये 5 मीटर गहरी नदी या नाले को भी आसानी से पार कर सकता है.

भीष्म टैंक के मुकाबले चीन के पास T-95 टैंक हैं, जिसकी ताकत भीष्म टैंक से ज्यादा नहीं है. इसके अलावा चीन ने भारतीय सीमा और पहाड़ी इलाके में लड़ाई के लिए बहुत हल्के वजन के टाइप 15 टैंक भी लगाए हैं. लेकिन टैंकों के मामलों में चीन अभी भारत से पीछे है. 

भारतीय सेना के पास करीब 4300 टैंक हैं तो चीन के पास 3500 टैंक ही हैं. 

2016 में भारत ने लद्दाख में टैंकों की पहली बिग्रेड तैनात की थी. इसमें T-72 टैंक थे, लेकिन जब चीन की तरफ से LAC पर T-95 टैंकों की तैनाती की खबरें आईं, तो भारतीय सेना ने टी-90 भीष्म टैंकों को लद्दाख में उतार दिया. 

भारत और चीन के बीच मौजूदा हालात से चार निष्कर्ष निकलते हैं.

पहली बात ये है कि अब भारत और चीन के बीच भरोसे की बहुत ज्यादा कमी हो चुकी है. और अगर चीन अपने वादों को तोड़ता रहा तो फिर इसके परिणाम बहुत खतरनाक हो सकते हैं.

दूसरी बात ये है कि अब दोनों देशों के बीच एक मनोवैज्ञानिक युद्ध चल रहा है. ये मनोवैज्ञानिक युद्ध पहले चीन ने शुरू किया, और उसे लगा कि वो ये लड़ाई बिना लड़े ही जीत जाएगा लेकिन भारत ने अपने आक्रामक रवैये से जवाब देकर चीन को हैरान कर दिया.

तीसरी बात ये है कि भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और अगर ऐसे ही तनाव बढ़ता रहा तो गलवान घाटी जैसी घटना अब LAC के किसी दूसरे हिस्से में भी हो सकती है.

चौथी बात ये है कि अगर गलवान घाटी जैसी कोई दूसरी घटना हो गई, तो फिर ये तनाव बड़े टकराव में बदल जाएगा और इसमें आगे चलकर युद्ध का भी खतरा हो सकता है.

बुधवार को चीन ने पहली बार ये बात स्वीकार कर ली, कि उसे भारत द्वारा गलवान घाटी में LAC के करीब सड़कें और पुल बनाने से ही परेशानी है. ये बयान चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की तरफ से आया है. खुद चीन अब ये मान रहा है कि ये 1962 का भारत नहीं है और ये भारत चीन को उसी की भाषा में जवाब देना जानता है. 

अब आपको ये पूरी तरह से समझ में आ गया होगा कि चीन LAC पर टकराव करने वाली हरकतें क्यों कर रहा है. अगर पहले की सरकारों की तरह आज का भारत सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर ना बनाता तो चीन कुछ नहीं बोलता। चीन को असली परेशानी यही है कि आज भारत की सरकार सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने को लेकर बहुत सक्रिय है और इसी से चीन को डर लगता है.



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