DNA Analysis: The whole drama of Vikas Dubey’s arrest | DNA ANALYSIS: गैंगस्टर विकास दुबे की गिरफ्तारी का ‘ड्रामा’

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नई दिल्ली: विकास दुबे (Vikas Dubey) की गिरफ्तारी ने देश के पुलिस सिस्टम की पोल खोल दी है. एक ऐसा अपराधी, जिसने 8 पुलिसकर्मियों की हत्या की. फिर 7 दिन तक वो पुलिस को छकाता रहा. 5 राज्यों की पुलिस उसके पीछे थी, इसके बाद भी उसे पुलिस नहीं पकड़ पाई, बल्कि उसने बेहद शातिर तरीके से खुद को पुलिस के हवाले कर दिया. अब आप सोचिए कि हमारे देश में विकास दुबे जैसे अपराधियों की सोच, पुलिस से कहीं आगे है.

ये ऐसे अपराधी हैं, जो खुद की गिरफ्तारी देने के लिए भी जगह खुद चुनते हैं और पुलिस सिर्फ देखती रह जाती है. दो दिन से जिस विकास दुबे को हरियाणा के फरीदाबाद में खोजा जा रहा था, जिस विकास दुबे की तलाश में बुधवार, नोएडा में फिल्म सिटी की नाकेबंदी कर दी गई थी, वही विकास दुबे गुरुवार सुबह मध्य प्रदेश के उज्जैन में मिला, और वो भी महाकाल के मंदिर में जहां से उसे गिरफ्तार किया गया.

सवाल तो ये है कि जिस विकास दुबे को पुलिस, फरीदाबाद और नोएडा में ढूंढ रही थी, वो अचानक उज्जैन कैसे पहुंच गया. जिस अपराधी के पीछे उत्तर प्रदेश पुलिस की 100 टीमें और यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स लगी थी, जिस अपराधी की तलाश पांच राज्यो में हो रही थी, वो अपराधी कैसे किसी की पकड़ में आए बिना, उत्तर प्रदेश से दिल्ली और हरियाणा होते हुए राजस्थान, फिर मध्य प्रदेश पहुंच गया?

गिरफ्तारी या सरेंडर? 
जाहिर है कि अपराधी विकास दुबे की पकड़ बहुत मजबूत होगी, तभी उसने, इस तरह से इतने बड़े सिस्टम को 7 दिन तक छका दिया और जब चाहा, तब उसने खुद की गिरफ्तारी दे दी. कहने के लिए तो मध्य प्रदेश पुलिस ने उज्जैन के महाकाल मंदिर से विकास दुबे को गिरफ्तार किया, लेकिन पहली नजर में यही लगता है कि ये गिरफ्तारी नहीं, सुनियोजित तरीके से कैमरे के सामने किया गया सरेंडर है.

विकास दुबे को ये पता था कि उसकी तस्वीरें वायरल हो चुकी हैं और उसे अब कोई भी पहचान लेगा. मंदिर में सुरक्षा गार्ड और पुलिसकर्मी दोनों तैनात रहते हैं, इसके बाद भी विकास दुबे आज सुबह उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचा, वहां पर उसने वीआईपी दर्शन के लिए टिकट काउंटर से ढाई सौ रुपये की पर्ची कटवाई.

गिरफ्तारी से पहले उसने फोटो भी खिंचवाईं. पकड़े जाने पर वो बड़े आराम से मंदिर से बाहर निकला. जब पुलिसकर्मी, उसे गिरफ्तार करके मंदिर से बाहर लेकर आ रहे थे, तो वो कैमरों के सामने ये कह रहा था- ‘मैं विकास दुबे, कानपुरवाला’.

अब आप सोचिए कि क्या आपने कभी इतनी शान से किसी अपराधी को खुद का नाम बताते हुए देखा है. असल में ऐसे अपराधी, हमारे कानून और सिस्टम को चुनौती देते हैं कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा.

उज्जैन में 8 घंटे की पूछताछ के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने विकास दुबे को उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स के हवाले कर दिया. वैसे तो ये साफ तौर पर दिख रहा है कि विकास दुबे की गिरफ्तारी, उसके सरेंडर की सोची समझी रणनीति थी. लेकिन मध्य प्रदेश पुलिस, ये बात स्पष्ट तौर पर मानने से हिचक रही है. मध्य प्रदेश पुलिस का कहना है कि महाकाल मंदिर में विकास दुबे ने गलत नाम बताया था, और उसकी पहचान करके ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था.

7 दिन, 7 रातों तक सिस्टम को देता रहा चकमा
इस अपराधी ने कैसे 7 दिन और 7 रात, पूरे पुलिस तंत्र को चकमा दिया. इन 7 दिन, 7 रात में, विकास दुबे कहां-कहां रहा, कैसे इसने खुद को पुलिस से बचाया ये जानकर आप ये समझ जाएंगे कि विकास दुबे जैसे अपराधियों का दिमाग कैसे पुलिस से भी तेज चलता है.

– दो जुलाई की रात को आठ पुलिसवालों की हत्या करने के बाद विकास दुबे मोटरसाइकिल लेकर अकेला ही बिकरु गांव से भाग निकला.
– तीन जुलाई की सुबह वो बिकरु गांव से सिर्फ चार किलोमीटर दूर शिवली गांव पहुंचा जहां वो अपने दोस्त शुभम पाल के घर रुका.
– तीन और चार जुलाई, यानी दो दिन वो शुभम पाल के घर पर ही रुका.
– चार जुलाई की रात को विकास दुबे अपने तीन साथियों अमर दुबे, कार्तिकेय और विकास के साथ बस पकड़कर दिल्ली के लिए निकला.
– पांच जुलाई की सुबह विकास दुबे अपने साथियों के साथ दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे पहुंचा. और वहां से बस लेकर सीधा फरीदाबाद पहुंच गया.
– फरीदाबाद में विकास दुबे अपने रिश्तेदार, श्रवण और अंकुर के घर पहुंचा.
– छह जुलाई को फरीदाबाद से विकास दुबे और अंकुर मिश्रा मोटरसाइकिल से अपने दोस्त रवि पांडे की तलाश में रोहिणी सेक्टर वन गए. इस दौरान विकास दुबे ने अपना फोन फेंक दिया था इसलिए वो अपने दोस्त से संपर्क नहीं कर पाया और वापस फरीदाबाद लौट गया.
– सात जुलाई को दोपहर करीब एक बजे वो फरीदाबाद के एक होटल के रिसेप्शन के सीसीटीवी कैमरे मे रिकॉर्ड हुआ. तीन बजे पुलिस उस होटल से लगभग पांच किलोमीटर दूर फरीदाबाद के उस घर में पहुंची जहां विकास दूबे छिपा हुआ था. वहां से विकास के तीन साथियों को गिरफ्तार किया गया. इसके बाद करीब सवा तीन बजे विकास दुबे एक रेस्टोरेंट के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड होता है. जहां से वो ऑटो पकड़कर निकल जाता है.
– आठ जुलाई को जिस वक्त यूपी पुलिस दिल्ली-एनसीआर में नाकाबंदी लगाकर विकास दुबे को पकड़ने की कोशिशों मे जुटी थी उसी दौरान विकास दुबे मध्य प्रदेश का सफर तय कर रहा था. फरीदाबाद से 850 किलोमीटर लंबा सफर तय करके विकास दुबे उज्जैन पहुंचा. और 9 जुलाई की सुबह महाकाल मंदिर में उसे पकड़ लिया गया. 

सात दिन और सात रात की इस भागमभाग के दौरान विकास दुबे कई बार पुलिस से बचकर निकला लेकिन इस दौरान उसे भागने में मदद करने वाले उसके साथी या तो पुलिस की गिरफ्त में आते गए या फिर मुठभेड़ में मारे गए. उज्जैन में विकास दुबे की गिरफ्तारी से ठीक पहले दुबे के दो करीबी साथी प्रभात मिश्रा और प्रवीण का यूपी पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया.

जिस तरह एक के बाद एक उसके साथी मारे जा रहे थे, उससे विकास दुबे को हर वक्त अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था. उसे पता था कि आठ पुलिसवालों की हत्या करके बहुत बड़ी गलती कर दी है. लेकिन अब जब विकास दुबे को जिंदा गिरफ्तार किया गया है, तो उन लोगों की नींद भी जरूर उड़ गई होगी, जिनके संरक्षण में विकास दुबे ने अपराध का साम्राज्य खड़ा कर लिया था. 

कुछ ऐसी है विकास दुबे की गिरफ्तारी की कहानी
अंग्रेजी के मशहूर नाटककार विलियम शेक्सपीयर (William Shakespeare) का एक प्रसिद्ध नाटक है जिसका नाम है द कॉमेडी ऑफ एरर्स (The Comedy Of Errors). इस नाटक के केंद्र में है इसके मुख्य किरदार की गलत पहचान.

जब समस्याएं गंभीर हों और उसका निदान करने के अजीबो-गरीब तरीकों पर आपको हंसी आने लगे तो आप इसे भी कॉमेडी ऑफ एरर्स कह सकते हैं. विकास दुबे की गिरफ्तारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. एक खूंखार अपराधी पहले 8 पुलिस वालों की हत्या करता है, फिर 7 रातों और 7 दिनों तक उसे उत्तर प्रदेश पुलिस की 40 थानों की टीमें और 5 राज्यों की पुलिस दिन रात ढूंढती है. लेकिन वो अचानक एक दिन सुबह उज्जैन के महाकाल मंदिर के प्रांगण में टहलता हुआ मिलता है. 

एक ऐसा व्यक्ति जिसकी उम्र 55 वर्ष से ज्यादा है. शरीर पर मोटापा चढ़ा हुआ है और जिसे देखकर लगता है कि ये व्यक्ति 50 मीटर भी नहीं भाग सकता. वो व्यक्ति 7 दिनों में 1200 किलोमीटर की यात्रा करता है. गाड़ी में बैठकर आराम से खाते-पीते मंदिर पहुंचता है. वहां पहुंचकर दुकानदारों से बातचीत करता है. VIP दर्शन की पर्ची कटवाता है, करीब 2 घंटे तक वहीं पर घूमता फिरता है, और तस्वीरें भी खिंचवाता है. ऐसा लगता है कि विकास दुबे फरार नहीं था बल्कि 7 रातों और 7 दिनों का टूर पैकेज लेकर भ्रमण पर निकला था. मजे की बात ये है कि जिस गैंगस्टर को उत्तर प्रदेश पुलिस के बड़े अधिकारी ढूंढ़ नहीं पा रहे थे, जिस अपराधी ने 5 राज्यों की पुलिस को छका दिया उस गैंगस्टर को महाकाल मंदिर का एक गार्ड पहचान लेता है जिसका नाम है लखन. लखन लगातार 2 घंटे तक उस पर नजर बनाए रखता है और आखिर में स्थानीय पुलिस वालों को इसकी सूचना दी जाती है और पुलिस विकास दुबे को गिरफ्तार करने पहुंचती है.

यानी जब सैंकड़ों पुलिस वाले विकास दुबे के निशानों का पीछा कर रहे थे. उस समय विकास दुबे उज्जैन के एक प्रसिद्ध मंदिर में गिरफ्तारी से बचने की प्रार्थना कर रहा था. जिस समय विकास दुबे को उत्तर प्रदेश की पुलिस नोएडा की फिल्म सिटी में न्यूज चैनलों के स्टूडियो में ढूंढ रही थी उस समय विकास दुबे गूगल मैप पर उज्जैन पहुंचने का शॉर्ट कट वाला रास्ता ढूंढ रहा था. इस दौरान वो करीब 10 से ज्यादा टोल प्लाजा पर रुका होगा और उसने यहां टोल भी चुकाया होगा. लेकिन किसी ने उसे पहचाना नहीं, किसी ने उसे रोका नहीं. जबकि इस दौरान उत्तर प्रदेश की पुलिस नोएडा से गुजरने वाली गाड़ियों की गहराई से जांच कर रही थी और शायद उम्मीद कर रही थी कि विकास दुबे के नोएडा आने की अफवाहे सच साबित हो जाएं और उसे पकड़ा जा सके.

जाहिर है अब उत्तर प्रदेश पुलिस कह सकती है कि उनकी भागदौड़ में कोई कमी नहीं थी. लेकिन जिस विकास दुबे को सैंकड़ों पुलिस वाले मिलकर नहीं ढूंढ पाए उसे एक सामान्य से गार्ड ने पकड़ लिया. लेकिन आप विडंबना देखिए पकड़े जाने के बाद भी विकास दुबे चिल्लाकर कहता है कि मैं विकास दुबे हूं… कानपुर वाला. विकास दुबे का ये डायलॉग सुनकर लगता है जैसे अपराध करने वालों का भी अपना फ्रेंचाइजी सिस्टम है और ये अपराधी खुद को किसी ब्रांड एंबेसडर से कम नहीं समझते.



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