Fake Remeddivir Is Coming From Nepal! Gang Busted For Selling 90 Rupees Injection In Thousands Ann

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अररिया: भारत के पड़ोसी देश नेपाल की पुलिस ने नकली रेमडेसिविर बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस गिरोह के सदस्य नेपाल में 90 रुपये में मिलने वाले एंटीबायोटिक इंजेक्शन ‘स्टासेफ’ की बोतलों में रेमडेसिविर का लेबल लगा कर सात से 35 हजार रुपये में बेचने का काम करते थे. सीमावर्ती इलाका होने के कारण ये गिरोह बिहार के अररिया समेत अन्य जिलों में भी फैला हुआ था. भारत और नेपाल के लोग मिलकर कोरोना काल में ये गोरखधंधा कर रहे थे. 

दो दवा दुकानदारों को किया गिरफ्तार

दरअसल, नेपाल के विराटनगर नगर पुलिस की विशेष शाखा को सूचना मिली थी कि दवा दुकानदार नकली दवा का कारोबार कर रहे हैं. सूचना के आधार पर दो दवा दुकानदार सोनू आलम और श्रवण यादव की गिरफ्तारी की गई. उनके पास से नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन भी बरामद किए गए हैं. मोरंग जिले के एसपी संतोष खड़का ने बताया कि विराटनगर में नकली रेमडेसिविर की बिक्री की सूचना मिलने पर कुछ दवा दुकानों में छापेमारी की गई थी. इस दौरान कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.

वायल के एक ही साइज होने का उठाया फायदा

एंटीबायोटिक दवा स्टासेफ और कोरोना के इलाज में कारगर रेमडेसिविर इंजेक्शन के डब्बे का साइज एक होने का फायदा ये नकली दवा के कारोबारी उठा रहे थे. ये कोरोना मरीजों को सात से 35 हजार रुपये लेकर नकली रेमडेसिविर देते थे. एसपी खड़का ने बताया कि गिरफ्तार फॉर्मेसी संचालक सोनू आलम यह नकली रेमडेसिविर कहां से लाता था, इसकी जानकारी पुलिस जांच के बाद ही मिल पाएगी. वहीं, पुलिस सूत्रों की मानें तो भारी मात्रा में स्टासेफ इंजेक्शन की खरीददारी विराटनगर की होलसेल दवा दुकान गणेश ड्रग्स हाउस से की गई थी.

बता दें कि पकड़े गए नकली दवा कारोबारियों का नाम पहले भी दवा तस्करी में आ चुका है. इससे पूर्व टिकुलिया से सटे नेपाल के दरहिया से श्रवण यादव को भारत से रेमडेसिविर इंजेक्शन की तस्करी में दवा के साथ पुलिस ने गिरफ्तार किया था. लेकिन राजनीतिक दबाव के बाद जमानत पर वह रिहा हो गया था.

जोगबनी के रास्ते पूर्णिया तक फैला है जाल

विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इस नकली दवा गिरोह के कुछ माफिया अररिया जिले के बथनाहा में भी बैठे हैं, जिसके माध्यम से सम्पर्क स्थापित कर नकली रेमडेसिविर को अस्पताल में भर्ती मरीजों तक सप्लाई किया जा रहा है. सूत्रों की मानें तो इनके द्वारा इस्लामपुर में बनाये गए अवैध रास्ते और टिकुलिया के रास्ते दवा की तस्करी पुलिस को चकमा देकर की जाती है.

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